03

Hot Nighty

खुराना मेंशन,

आशी जैसे ही अपने रूम के बाहर पहुंचती है डोर अपने आप खुल जाता है, "डोर डिजिटल होने के कारण आशी का face स्कैन होते ही खुल जाता हैं।

आशी अंदर आ कर देखती है कि रूम की light अभी भी चालू थी, और साइड टेबल पर काव्यांश बैठ कर अपने लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था।

इतनी जल्दी ही खत्म हो गया क्या तुम्हारा फंक्शन, काव्यांश ने अपने लैपटॉप में देखते हुए ही कहा. काव्यांश की बात सुन कर आशी की आँखें सिकुड़ जाती है फिर वो काव्यांश के साइड में सोफे पर जा कर बैठ जाती है, मुझे पूछ रहे हो या फिर टोंट मार रहे हो, आशी ने अपनी जूतियां उतारते हुए काव्यांश से कहा।

अब तुम कुछ भी समझो, लेकिन मैने जो पूछा है उसका जवाब तो दो, इस बार भी काव्यांश ने आशी की तरफ बिना देखे ही कहा।।

"मुझे तुम्हारी बात में नॉर्मल बात कम और टोंट ज्यादा लग रहा है, वैसे ज्यादा लेट तो नहीं हुई हु 12 ही बज रहे है और वैसे भी अगर में लेट हो भी गई थी तो उससे तुम्हें क्या. तुम तो सो जाते ना क्यों इतनी लेट तक जग रहे हो उल्लुओं कि तरह, आशी ने एक ही सांस में बोल दिया फिर उसने एक गहरी सांस ली!!""

काव्यांश तो बस उसे आँखें फाड़े देखे जा रहा था, कितनी अजीब हो यार तुम पता नहीं दादाजी ने किस झल्ली को मेरे साथ बांध दिया, काव्यांश ने अपना लैपटॉप बंद करके अपने सिर पर हाथ रखते हुए कहा!!

तुमने मुझे झल्ली बोला आशी ने काव्यांश को घूरते हुए कहा।

देखो यार प्लीज़ तुम अभी लड़ना शुरू मत हो जाओ, ये लड़ाई कल के लिए छोड़ दो फिलहाल में अभी काफी ज्यादा थक गया हु और काफी नींद आ रही है इसलिए में सो रहा हूं इतना बोल कर काव्यांश बेड पर जा कर लेट जाता हैं।

आशी काव्यांश को बोलना तो बहुत कुछ चाहती थी लेकिन वो भी काफी ज्यादा थक गई थी इस लिए वो कुछ नहीं बोलती और वॉर्डरोब से कपड़े ले कर सीधा चेंज करने चली जाती है. काव्यांश आशी को जाते हुए देख कर मुस्कुरा देता है, well done kavyansh बेटा तो फाइनली तुमने अपनी बीवी का मुंह बंद करवाना सिख ही लिया, काव्यांश ने अपनी खुद की तारीफ करते हुए कहा।

कुछ देर बाद आशी कपड़े चेंज करके आती है , काव्यांश जो बेड पर लेटे लेते पता नहीं क्या सोचे जा रहा था उसकी नजरे एका एक आशी पर टिक जाती है!! आशी को देख कर उसके दिल की धड़कने तेज हो जाती है और उसे अपनी शरीर में गर्मी का अहसास होने लगता हैं।

"ये लड़की क्या करना चाहती है मतलब मैने इसकी बोली बन्द कर दी तो उसका बदला ये इस तरीके से लेगी मुझसे, काव्यांश ने अपना थूक निंगलते हुए अपने मन में कहा!!

इस वक्त आशी ने एक ब्लैक color की nighty पहन रखी थी जो उसकी थाई तक आ रही थी, उसके उस नाइटी से उसका privat part और ब**s ही ढक रखे थे जो कि वो भी काफी हद तक रिवील हो रहे थे। बाकी उसकी पूरी बॉडी उस नाइटी का नेट की होने के कारण काव्यांश के सामने थी।

आशी आ कर सीधा काव्यांश के बगल में लेट जाती है, आशी ने अभी तक काव्यांश को नहीं देखा था जो कब से उसे आँखें फाड़े देखे जा रहा था।

आशी को अपने इतना करीब महसूस करके काव्यांश के शरीर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ने लगती है, "oh god क्या कर रही है ये लड़की इतना सेड्यूस तो में टीना के साथ होता था तब भी नहीं होता था। तब तो वो मुझे सेड्यूस करने के लिए कितना कुछ करती थी लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था तो अब क्या हो रहा है मुझे, इसने तो मुझे सेड्यूस भी नहीं किया फिर भी मुझ पर इसे देख कर ही इतना असर क्यों पड़ रहा है, काव्यांश ने अपने मन में कहा!!

इसके कारण अब तो में अपने आप को शांत करने के लिए किसी लड़की के पास भी नहीं जा सकता, लगता है मुझे अपने हाथों से ही काम चलाना पड़ेगा इतना बोल कर काव्यांश बेड से उठता है और बाथरूम में चला जाता हैं।

आशी को तो बेड पर लेटते ही नींद आ गई थी इस लिए उसे तो भनक भी नहीं थी कि उसके कारण काव्यांश को क्या कुछ सहन करना पड़ रहा है.

Next Morning,

Aaahhhaaaaa बाथरूम से किसी के चिल्लाने की आवाज आती है, नहीं नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है "में ऐसे कपड़े कभी नहीं पहन सकती, इन्हें तो कपड़े होने पर भी एक शर्म की बात है। ये लड़की कोई और नहीं बल्कि आशी थी जो फ्रेश होने के लिए बाथरूम में आई थी और जब उसने अपनी हालत मिरर में देखी तो अपने आप को चिल्लाने से रोक नहीं पाई।

हे भगवान में भी ना कितनी बड़ी बेवकूफ हु, अगर रात को में इतनी ज्यादा थकी हुई भी थी तो क्या मुझे एक बार चेक तो करना चाहिए था ना कि क्या ले जा रही हु और मैने पहना क्या है, आशी ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए अपने आप से कहा!!

एक मिनिट अगर मैंने ध्यान नहीं दिया था तो क्या वो मेरा दानव जैसा पति तो मुझे बता ही सकता था ना ये सोच कर आशी के चेहरे पर गुस्सा झलक जाता हैं।

काव्यांश kavyanshhhh कहा हो तुम, तुम ना बिल्कुल ठरकी हो, तुम्हें तो में आज बिल्कुल नहीं छोडूंगी, निहायती बेशर्म इंसान मुझे बता नहीं सकते थे तुम इतना बोल कर ही आशी चुप हो जाती है क्योंकि वो वॉशरूम से बाहर आ गई थी और रूम में चारों तरफ देख लिया था लेकिन उसे काव्यांश कही नजर नहीं आया. वो समझ गई थी कि काव्यांश इस वक्त रूम में नहीं है, वो ऑफिस निकल चुका है क्योंकि आज आशी को उठने में काफी लेट हो गया था!!

भले ही तुम इस वक्त ऑफिस में हो मिस्टर दानव खुराना, तुम तो बस ऑफिस में रेडी रहना तुम्हें तो में ऑफिस में आ कर बताती 'इतना बोल कर आशी वापिस बाथरूम में नहाने चली जाती हैं।

दूसरी तरफ,

एक अंधेरे कमरे में एक लड़की की ज़ोर जोर से हंसने की आवाज़ गूंज रही थी, Hhhaaahhhh बस आज का दिन और उसके बाद तुम हमेशा हमेशा के लिए उस मजबूती के रिश्ते से आजाद हो जाओगे और हमेशा हमेशा के लिए मेरे हो जाओगे, उस लड़की ने एक बड़ी सी तस्वीर पर हाथ फेरते हुए कहा!!

या फिर यूं बोले कि हमारे प्लान को अंजाम देने की पहली सीढ़ी पार कर जाएंगे, उस लड़की के पास एक लड़के ने आते हुए कहा।

तुम बिल्कुल ठीक बोल रहे हो सूरज, आज फाइनली हम हमारे मकसद की पहली सीढ़ी पार कर जाएंगे. वैसे टीना ये तो पहले भी हो सकता था ना मेरा मतलब काव्यांश की शादी से पहले उस लड़के सूरज ने टीना से कहा!!

सूरज मेरा नाम टीना रायजादा है, तुम्हें क्या लगता है में पहले नहीं करना चाहती थी ये। में डैड के काम से लंदन क्या गई यहां पर तो पूरी बाजी ही पलट गई, शादी कर ली उस बेवकूफ काव्यांश ने, टीना ने दांत बिछते हुए सूरज से कहा!!

अब ये सब छोड़ो और बताओ क्या प्लान है तुम्हारा, क्या करने वाली हो उस आशी के साथ तुम आज "सूरज ने excited होते हुए टीना से पूछा!!

टीना जा कर एक कुर्सी पर एक पैर पर दूसरा पैर चढ़ा कर बैठ जाती है, तो जैसा कि तुम्हें पता ही है आज दशहरा है इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी, लेकिन आज ऐसा कुछ नहीं होने वाला। आज अच्छाई पर बुराई की जीत होगी, बुराई के साथ अच्छाई भी जलेगी आज, टीना ने एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ सूरज से कहा!!

तुम क्या बोल रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आया, अच्छे से समझाओ ना "सूरज की बात सुन कर टीना उसे अपना प्लान बताने लगती है, जैसे जैसे वो उसे अपना प्लान बता रही थी वैसे वैसे सूरज के चेहरे पर भी एक बेशर्मी भरी हंसी छा रही थी ।

तुम तो बड़ी कमानी चीज हो सूरज ने टीना की तरफ देखते हुए कहा, "जो भी हु बस तुम्हारी हु इतना बोल कर टीना सूरज के होंठो से अपने होंठ मिला देती हैं।

खुराना मेंशन,

दादी मां आप समझ नहीं रही हो में क्या बोलने की कोशिश कर रही हु, आशी ने वेदिका जी से कहा।

में सब अच्छे से समझ रही हु कि आप क्या बोलने की कोशिश कर रही हो लेकिन कोई जरूरत नहीं है उस नालायक के लिए खाना ले कर उसके ऑफिस जाने की, वेदिका जी ने आशी से मना करते हुए कहा।

*आशी पिछले 10 मिनिट से वेदिका जी को बोल रही थी कि वो उसे काव्यांश के लिए लंच ले कर ऑफिस जाने दे, लेकिन वेदिका जी उसे मना कर रही थी!!

आशी के दिमाग में कुछ आता है फिर वो वेदिका जी से बोलती है, क्या आप नहीं चाहती दादी मां की मेरे और काव्यांश के बीच नजदीकिया बड़े अगर में ऐसे ही उससे दूर दूर रही तो कही ऐसा ना हो कि कोई और लड़की मेरे पति को अपने जाल में फंसा ले और मुझे हमेशा के लिए अपने पति से दूर कर दे, आशी ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा।

ऐसा कभी नहीं होगा बेटा, में तो चाहती हु की तुम दोनों के बीच जो भी दूरियां है वो हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाए और जल्दी से मुझे एक परपोता या परपोती दे दो. अपनी बातों का असर वेदिका जी पर होता देख आशी आगे बोलती है, तो फिर मेरी प्यारी सी दादी मां ये तभी होगा ना जब मैं और काव्यांश एक साथ अकेले कुछ टाइम स्पेंड करेंगे।

आशी की बात सुन कर वेदिका जी समझ जाती है और वो आशी को जाने की परमिशन दे देती हैं।

तो कैसा लगा आप लोगों को ये चैप्टर comment करके जरूर बताना।

खुराना मेंशन, आशी जैसे ही अपने रूम के बाहर पहुंचती है डोर अपने आप खुल जाता है, "डोर डिजिटल होने के कारण आशी का face स्कैन होते ही खुल जाता हैं। आशी अंदर आ कर देखती है कि रूम की light अभी भी चालू थी, और साइड टेबल पर काव्यांश बैठ कर अपने लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था। इतनी जल्दी ही खत्म हो गया क्या तुम्हारा फंक्शन, काव्यांश ने अपने लैपटॉप में देखते हुए ही कहा. काव्यांश की बात सुन कर आशी की आँखें सिकुड़ जाती है फिर वो काव्यांश के साइड में सोफे पर जा कर बैठ जाती है, मुझे पूछ रहे हो या फिर टोंट मार रहे हो, आशी ने अपनी जूतियां उतारते हुए काव्यांश से कहा। अब तुम कुछ भी समझो, लेकिन मैने जो पूछा है उसका जवाब तो दो, इस बार भी काव्यांश ने आशी की तरफ बिना देखे ही कहा।। "मुझे तुम्हारी बात में नॉर्मल बात कम और टोंट ज्यादा लग रहा है, वैसे ज्यादा लेट तो नहीं हुई हु 12 ही बज रहे है और वैसे भी अगर में लेट हो भी गई थी तो उससे तुम्हें क्या. तुम तो सो जाते ना क्यों इतनी लेट तक जग रहे हो उल्लुओं कि तरह, आशी ने एक ही सांस में बोल दिया फिर उसने एक गहरी सांस ली!!"" काव्यांश तो बस उसे आँखें फाड़े देखे जा रहा था, कितनी अजीब हो यार तुम पता नहीं दादाजी ने किस झल्ली को मेरे साथ बांध दिया, काव्यांश ने अपना लैपटॉप बंद करके अपने सिर पर हाथ रखते हुए कहा!! तुमने मुझे झल्ली बोला आशी ने काव्यांश को घूरते हुए कहा। देखो यार प्लीज़ तुम अभी लड़ना शुरू मत हो जाओ, ये लड़ाई कल के लिए छोड़ दो फिलहाल में अभी काफी ज्यादा थक गया हु और काफी नींद आ रही है इसलिए में सो रहा हूं इतना बोल कर काव्यांश बेड पर जा कर लेट जाता हैं। आशी काव्यांश को बोलना तो बहुत कुछ चाहती थी लेकिन वो भी काफी ज्यादा थक गई थी इस लिए वो कुछ नहीं बोलती और वॉर्डरोब से कपड़े ले कर सीधा चेंज करने चली जाती है. काव्यांश आशी को जाते हुए देख कर मुस्कुरा देता है, well done kavyansh बेटा तो फाइनली तुमने अपनी बीवी का मुंह बंद करवाना सिख ही लिया, काव्यांश ने अपनी खुद की तारीफ करते हुए कहा। कुछ देर बाद आशी कपड़े चेंज करके आती है , काव्यांश जो बेड पर लेटे लेते पता नहीं क्या सोचे जा रहा था उसकी नजरे एका एक आशी पर टिक जाती है!! आशी को देख कर उसके दिल की धड़कने तेज हो जाती है और उसे अपनी शरीर में गर्मी का अहसास होने लगता हैं। "ये लड़की क्या करना चाहती है मतलब मैने इसकी बोली बन्द कर दी तो उसका बदला ये इस तरीके से लेगी मुझसे, काव्यांश ने अपना थूक निंगलते हुए अपने मन में कहा!! इस वक्त आशी ने एक ब्लैक color की nighty पहन रखी थी जो उसकी थाई तक आ रही थी, उसके उस नाइटी से उसका privat part और ब**s ही ढक रखे थे जो कि वो भी काफी हद तक रिवील हो रहे थे। बाकी उसकी पूरी बॉडी उस नाइटी का नेट की होने के कारण काव्यांश के सामने थी। आशी आ कर सीधा काव्यांश के बगल में लेट जाती है, आशी ने अभी तक काव्यांश को नहीं देखा था जो कब से उसे आँखें फाड़े देखे जा रहा था। आशी को अपने इतना करीब महसूस करके काव्यांश के शरीर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ने लगती है, "oh god क्या कर रही है ये लड़की इतना सेड्यूस तो में टीना के साथ होता था तब भी नहीं होता था। तब तो वो मुझे सेड्यूस करने के लिए कितना कुछ करती थी लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था तो अब क्या हो रहा है मुझे, इसने तो मुझे सेड्यूस भी नहीं किया फिर भी मुझ पर इसे देख कर ही इतना असर क्यों पड़ रहा है, काव्यांश ने अपने मन में कहा!! इसके कारण अब तो में अपने आप को शांत करने के लिए किसी लड़की के पास भी नहीं जा सकता, लगता है मुझे अपने हाथों से ही काम चलाना पड़ेगा इतना बोल कर काव्यांश बेड से उठता है और बाथरूम में चला जाता हैं। आशी को तो बेड पर लेटते ही नींद आ गई थी इस लिए उसे तो भनक भी नहीं थी कि उसके कारण काव्यांश को क्या कुछ सहन करना पड़ रहा है. Next Morning, Aaahhhaaaaa बाथरूम से किसी के चिल्लाने की आवाज आती है, नहीं नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है "में ऐसे कपड़े कभी नहीं पहन सकती, इन्हें तो कपड़े होने पर भी एक शर्म की बात है। ये लड़की कोई और नहीं बल्कि आशी थी जो फ्रेश होने के लिए बाथरूम में आई थी और जब उसने अपनी हालत मिरर में देखी तो अपने आप को चिल्लाने से रोक नहीं पाई। हे भगवान में भी ना कितनी बड़ी बेवकूफ हु, अगर रात को में इतनी ज्यादा थकी हुई भी थी तो क्या मुझे एक बार चेक तो करना चाहिए था ना कि क्या ले जा रही हु और मैने पहना क्या है, आशी ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए अपने आप से कहा!! एक मिनिट अगर मैंने ध्यान नहीं दिया था तो क्या वो मेरा दानव जैसा पति तो मुझे बता ही सकता था ना ये सोच कर आशी के चेहरे पर गुस्सा झलक जाता हैं। काव्यांश kavyanshhhh कहा हो तुम, तुम ना बिल्कुल ठरकी हो, तुम्हें तो में आज बिल्कुल नहीं छोडूंगी, निहायती बेशर्म इंसान मुझे बता नहीं सकते थे तुम इतना बोल कर ही आशी चुप हो जाती है क्योंकि वो वॉशरूम से बाहर आ गई थी और रूम में चारों तरफ देख लिया था लेकिन उसे काव्यांश कही नजर नहीं आया. वो समझ गई थी कि काव्यांश इस वक्त रूम में नहीं है, वो ऑफिस निकल चुका है क्योंकि आज आशी को उठने में काफी लेट हो गया था!! भले ही तुम इस वक्त ऑफिस में हो मिस्टर दानव खुराना, तुम तो बस ऑफिस में रेडी रहना तुम्हें तो में ऑफिस में आ कर बताती 'इतना बोल कर आशी वापिस बाथरूम में नहाने चली जाती हैं। दूसरी तरफ, एक अंधेरे कमरे में एक लड़की की ज़ोर जोर से हंसने की आवाज़ गूंज रही थी, Hhhaaahhhh बस आज का दिन और उसके बाद तुम हमेशा हमेशा के लिए उस मजबूती के रिश्ते से आजाद हो जाओगे और हमेशा हमेशा के लिए मेरे हो जाओगे, उस लड़की ने एक बड़ी सी तस्वीर पर हाथ फेरते हुए कहा!! या फिर यूं बोले कि हमारे प्लान को अंजाम देने की पहली सीढ़ी पार कर जाएंगे, उस लड़की के पास एक लड़के ने आते हुए कहा। तुम बिल्कुल ठीक बोल रहे हो सूरज, आज फाइनली हम हमारे मकसद की पहली सीढ़ी पार कर जाएंगे. वैसे टीना ये तो पहले भी हो सकता था ना मेरा मतलब काव्यांश की शादी से पहले उस लड़के सूरज ने टीना से कहा!! सूरज मेरा नाम टीना रायजादा है, तुम्हें क्या लगता है में पहले नहीं करना चाहती थी ये। में डैड के काम से लंदन क्या गई यहां पर तो पूरी बाजी ही पलट गई, शादी कर ली उस बेवकूफ काव्यांश ने, टीना ने दांत बिछते हुए सूरज से कहा!! अब ये सब छोड़ो और बताओ क्या प्लान है तुम्हारा, क्या करने वाली हो उस आशी के साथ तुम आज "सूरज ने excited होते हुए टीना से पूछा!! टीना जा कर एक कुर्सी पर एक पैर पर दूसरा पैर चढ़ा कर बैठ जाती है, तो जैसा कि तुम्हें पता ही है आज दशहरा है इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी, लेकिन आज ऐसा कुछ नहीं होने वाला। आज अच्छाई पर बुराई की जीत होगी, बुराई के साथ अच्छाई भी जलेगी आज, टीना ने एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ सूरज से कहा!! तुम क्या बोल रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आया, अच्छे से समझाओ ना "सूरज की बात सुन कर टीना उसे अपना प्लान बताने लगती है, जैसे जैसे वो उसे अपना प्लान बता रही थी वैसे वैसे सूरज के चेहरे पर भी एक बेशर्मी भरी हंसी छा रही थी । तुम तो बड़ी कमानी चीज हो सूरज ने टीना की तरफ देखते हुए कहा, "जो भी हु बस तुम्हारी हु इतना बोल कर टीना सूरज के होंठो से अपने होंठ मिला देती हैं। खुराना मेंशन, दादी मां आप समझ नहीं रही हो में क्या बोलने की कोशिश कर रही हु, आशी ने वेदिका जी से कहा। में सब अच्छे से समझ रही हु कि आप क्या बोलने की कोशिश कर रही हो लेकिन कोई जरूरत नहीं है उस नालायक के लिए खाना ले कर उसके ऑफिस जाने की, वेदिका जी ने आशी से मना करते हुए कहा। *आशी पिछले 10 मिनिट से वेदिका जी को बोल रही थी कि वो उसे काव्यांश के लिए लंच ले कर ऑफिस जाने दे, लेकिन वेदिका जी उसे मना कर रही थी!! आशी के दिमाग में कुछ आता है फिर वो वेदिका जी से बोलती है, क्या आप नहीं चाहती दादी मां की मेरे और काव्यांश के बीच नजदीकिया बड़े अगर में ऐसे ही उससे दूर दूर रही तो कही ऐसा ना हो कि कोई और लड़की मेरे पति को अपने जाल में फंसा ले और मुझे हमेशा के लिए अपने पति से दूर कर दे, आशी ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा। ऐसा कभी नहीं होगा बेटा, में तो चाहती हु की तुम दोनों के बीच जो भी दूरियां है वो हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाए और जल्दी से मुझे एक परपोता या परपोती दे दो. अपनी बातों का असर वेदिका जी पर होता देख आशी आगे बोलती है, तो फिर मेरी प्यारी सी दादी मां ये तभी होगा ना जब मैं और काव्यांश एक साथ अकेले कुछ टाइम स्पेंड करेंगे। आशी की बात सुन कर वेदिका जी समझ जाती है और वो आशी को जाने की परमिशन दे देती हैं।

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